अंशà¥à¤®à¤¾à¤²à¥€ रसà¥à¤¤à¥‹à¤—ी
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के कमजोर कंधों पर बढ़ता सà¥à¤•ूल के बसà¥à¤¤à¥‡ का बोठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ न केवल गमà¥à¤à¥€à¤° बीमारियों की तरफ धकेल रहा है, साथ-साथ उनके शारीरिक à¤à¤µà¤‚ मानसिक विकास पर à¤à¥€ असर डाल रहा है।
बचà¥à¤šà¥‡ खà¥à¤¦ पर दोहरा दबाव महसूस कर रहे हैं, à¤à¤• तरफ बसà¥à¤¤à¥‡ का à¤à¤¾à¤° है तो दूसरी तरफ कोरà¥à¤¸ का हवà¥à¤µà¤¾à¥¤ रही सही कसर माता-पिता की उनसे जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ की जाने वाली अपेकà¥à¤·à¤¾à¤à¤‚ पूरी कर देती हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ तो बचà¥à¤šà¥‡ इतना कंफà¥à¤¯à¥‚जà¥à¤¡ हो जाते हैं कि वे आखिर करें तो करें कà¥à¤¯à¤¾? किस-किस की उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¥‹à¤‚ पर खरा उतरें। हालांकि मानव संसाधन à¤à¤µà¤‚ विकास मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ ने पिछले साल बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की पीठका बोठकम करने के लिठदिशा-निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ जारी किठथे, जिनमें-ककà¥à¤·à¤¾ à¤à¤• और दो के लिठबसà¥à¤¤à¥‡ का वजन डेढ़ किलो। तीसरी और पांचवी ककà¥à¤·à¤¾ के लिठदो से तीन किलो। छठवीं और सातवीं ककà¥à¤·à¤¾ के लिठचार किलो। आठवीं-नौंवी ककà¥à¤·à¤¾ के लिठसाढ़े चार किलो और दसवीं के लिठपांच किलो। बावजूद इसके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की पीठपर लदा बसà¥à¤¤à¥‡ का बोठअà¤à¥€ à¤à¥€ कम नहीं हà¥à¤† है। वो आज à¤à¥€ उतना ही à¤à¤¾à¤° अपने कंधों पर डाले सà¥à¤•ूल जा रहे हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ आखिर कà¥à¤¯à¤¾ करें? वे à¤à¥€ मजबूर हैं। जब कोरà¥à¤¸ की किताबों का इतना à¤à¤¾à¤° उन पर डाल दिया जाà¤à¤—ा। कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‡ तो इसलिठà¤à¥€ बोà¤à¤¾ लादकर सà¥à¤•ूल ले जाते हैं कि कà¥à¤¯à¤¾ पता टीचर कब कौन-सी किताब मांग ले। और ये सब टाइम-टेबल होने के बावजूद है। à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤•ूल बैग का औसत वजन 8 किलो होता है। à¤à¤• साल में तकरीबन 200 दिन तक बचà¥à¤šà¥‡ सà¥à¤•ूल जाते हैं। सà¥à¤•ूल जाने और वहां से वापस आने के समय जो वजन बचà¥à¤šà¤¾ अपने कंधों पर उठता है, यदि उसे आधार मानकर गणना की जाठतो वह साल में 3200 किलो का वजन ढो लेता है। ये à¤à¤• पीक-अप टà¥à¤°à¤• के बराबर है।
जरा सोचकर देखिà¤, इतना à¤à¤¾à¤° जब बचà¥à¤šà¤¾ इतनी छोटी उमà¥à¤° में उठा रहा है आगे चलकर जब उस पर पढ़ाई का à¤à¥€ अतिरिकà¥à¤¤ à¤à¤¾à¤° पड़ेगा तो वो कैसे अपनी पढ़ाई और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर à¤à¤•ागà¥à¤° रह पाà¤à¤—ा। दिन-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ बढ़ती तरह-तरह की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—िताओं की मांग उसे और à¤à¥€ मानसिक तनाव दे रही है। बसà¥à¤¤à¥‡ के à¤à¤¾à¤° को à¤à¥‡à¤²à¤¤à¥‡-à¤à¥‡à¤²à¤¤à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ कई तरह की गमà¥à¤à¥€à¤° बीमारियों के à¤à¥€ शिकार हो रहे हैं। ऑरà¥à¤¥à¥‹à¤ªà¥‡à¤¡à¤¿à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ का कहना है कि अगर बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤•ूल बैग का वजन बचà¥à¤šà¥‡ के वजन से 10 फीसद अधिक होता है तो 'à¤•à¤¾à¤‡à¤«à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸Ó à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ में सांस लेने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर इस अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° के लिठदोषी हम सब हैं। सà¥à¤•ूल बिना सोचे-समà¤à¥‡ मोटे मà¥à¤¨à¤¾à¤«à¥‡ की खातिर कोरà¥à¤¸ में किताबें बढ़ा देते हैं। माता-पिता की ओर से à¤à¥€ इसका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ विरोध दरà¥à¤œ किया नहीं जाता। सरकारें इसके लिठकितना गंà¤à¥€à¤° रहती हैं बताने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं। निजी सà¥à¤•ूलों की अपेकà¥à¤·à¤¾ सरकारी सà¥à¤•ूलों में बसà¥à¤¤à¥‡ का बोठफिर à¤à¥€ बहà¥à¤¤ कम है। लेकिन निजी सà¥à¤•ूलों को तो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कà¥à¤› ही दिनों में पढ़ाकू बनाना होता है, सो किताबों का à¤à¤¾à¤° लाद दिया जाता है। गाहे-बगाहे अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤• संघ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इसका विरोध किया à¤à¥€ जाता है पर उनकी आवाज अनसà¥à¤¨à¥€ ही रह जाती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूर कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जाते हैं, निजी सà¥à¤•ूलों में फीस बढ़ोतरी को लेकर पिछले दिनों जो हंगामा हà¥à¤†, वह à¤à¥€ बेनतीजा निकला। सà¥à¤•ूल अपनी में मसà¥à¤¤ हैं, सरकार अपनी में। à¤à¤¸à¤¾ नहीं है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर बसà¥à¤¤à¥‡ का बोठà¤à¤• ही दिन में डाल दिया गया हो। पांचवे दशक तक à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› à¤à¥€ नहीं था। न मोटी-मोटी किताबें थीं, न à¤à¤¾à¤°à¥€-à¤à¤°à¤•म बसà¥à¤¤à¥‡à¥¤
à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥€ नहीं है कि तब के बचà¥à¤šà¥‡ पढ़ते ही नहीं थे। तब बचà¥à¤šà¥‡ पढ़ते à¤à¥€ थे और अचà¥à¤›à¥‡ नमà¥à¤¬à¤°à¥‹à¤‚ से पास à¤à¥€ होते थे। लेकिन जब से हमारे बीच निजी सà¥à¤•ूलों ने अपना वरà¥à¤šà¤¸à¥à¤µ कायम किया है, तब से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर बसà¥à¤¤à¥‡ का बोठबढ़ता ही चला गया। हर मां-बाप की (अपवादों को छोड़ दें तो) यही तमनà¥à¤¨à¤¾ होती है कि उसका बचà¥à¤šà¤¾ पढ़े निजी सà¥à¤•ूल में ही। अपना पेट काटकर वे उसे उसमें पढ़ाते à¤à¥€ हैं। जो सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ कà¤à¥€ खà¥à¤¦ नहीं ली, अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को देते हैं। मगर बदले में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मिलता है, à¤à¤¾à¤°à¥€ बसà¥à¤¤à¥‡ का बोठऔर महंगी किताबें। सबकà¥à¤› जानते-समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ à¤à¥€ हम अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बसà¥à¤¤à¥‡ की बोठकी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में धकेल रहे हैं, यह उचित नहीं। हमें कोई-न-कोई मापदंड तो तय करना ही होगा। माना कि पढ़ाई जरूरी है, सà¥à¤²à¥‡à¤¬à¤¸ और कोरà¥à¤¸ à¤à¥€ जरूरी है पर वो à¤à¤¸à¤¾ तो हो कि बचà¥à¤šà¥‡ खà¥à¤¦ को हलà¥à¤•ा महसूस करें। बसà¥à¤¤à¤¾ उठाते वकà¥à¤¤ उनके कंधे न चरमराà¤à¤‚। वो किसी मानसिक व शारीरिक बीमारी का शिकार न बनें। जिस कल के लिठहम अनेक सपने देखते हैं, वो आज ही कहीं बोठतले न दब जाà¤à¥¤
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