फतेहपà¥à¤°à¥¤à¤œà¤¿à¤²à¥‡ मे अतीत से जोड़ने वाले सà¥à¤¥à¤² उपेकà¥à¤·à¤¾ व अनदेखी से खंडहर बन गà¥à¤®à¤¨à¤¾à¤®à¥€ की ओर बढ़ते जा रहे हैं।विरासत की यह धरोहरें फिर से उठखड़े होने के लिठयà¥à¤µà¤¾ पीढी की ओर निहार रही हैं।गंगा à¤à¤µà¤‚ यमà¥à¤¨à¤¾ नदी के दोआबा का उलà¥à¤²à¥‡à¤– वैदिक साहितà¥à¤¯ व पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ में मिलता है।अंतरà¥à¤µà¥‡à¤¦ के नाम से जिले की पहचान है।पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¤à¥à¤µ सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ के पà¥à¤°à¤¥à¤® महानिदेशक अलेकà¥à¤œà¥‡à¤‚डर कनिघम व चीनी यातà¥à¤°à¥€ हà¥à¤µà¥‡à¤¨à¤¸à¤¾à¤‚ग ने अशà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥€ कà¥à¤®à¤¾à¤° की नगरी के नाम से पहचान रखने वाले असनी का उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया है।
à¤à¤¿à¤Ÿà¥Œà¤°à¤¾ बà¥à¤²à¤¾à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आने वाले असनी में अब à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ मंदिरों की खंडहर होती जा रही शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला इसके महातà¥à¤® को दरà¥à¤¶à¤¾ रहे हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤µà¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ इस अंचल से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ अवशेष मौरà¥à¤¯ काल से बिटà¥à¤°à¤¿à¤¶ काल तक के हैं, जिनमें मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, मृदà¤à¤¾à¤‚ड व मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤à¤‚ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से शामिल हैं। बहà¥à¤† में काकोरा बाबा के नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ मंदिर के गरà¥à¤ गृह में à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ आकरà¥à¤·à¤£ का केंदà¥à¤° है।मंदिर दसवीं शताबà¥à¤¦à¥€ का माना जा रहा है।
देवरा बाबा के नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ कोरारी के मंदिर षोडशकोणीय है। इसी तरह à¤à¤¿à¤ ौरा में à¤à¥‹à¤°à¤¹à¤°à¥‡ बाबा के नाम का मंदिर दसवीं शताबà¥à¤¦à¥€ की कलाकृति को à¤à¤²à¤•ाता है।तेंदà¥à¤²à¥€ मे मधà¥à¤¯à¤•ालीन शैली की धरोहरें है।रेंय में पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के à¤à¤—à¥à¤¨à¤¾à¤µà¤¶à¥‡à¤· से जहां पौराणिक विरासत मिलती है,वहीं खजà¥à¤¹à¤¾ में बाग बादशाही à¤à¤µà¤‚ मà¥à¤—ल शासक औरंगजेब की बारादरी इतिहास का गवाह बनी है।
पà¥à¤°à¤¥à¤® सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ संगà¥à¤°à¤¾à¤® में 52 शहीदों को फांसी पर लटकाने का मूक गवाह इमली का बूढ़ा पेड़ बावनी इमली के नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ है जो बिंदकी से खजà¥à¤¹à¤¾ जाने वाले मारà¥à¤— में पारादान गांव के पास सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है।कà¥à¤› समय पहले पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¤à¥à¤µ विà¤à¤¾à¤— ने जिले के 28 सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ को धरोहर के रूप में चिहà¥à¤¨à¤¿à¤¤ कर बोरà¥à¤¡ तो लगा दिया था।लेकिन संरकà¥à¤·à¤£ के लिठकोई खास पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ नहीं किठगà¤à¥¤ जिला सà¥à¤¤à¤° पर à¤à¥€ किसी ने विरासत को सहेजने की दिशा में कदम नहीं बढ़ाठहैं।
नई यà¥à¤µà¤¾ पीढी को यह संकलà¥à¤ª लेना चाहिठकि हम धरोहरों को संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ कर अतीत के गौरव से नई पीढ़ी को अवगत कराà¤à¤‚गे।अनà¥à¤•ाल व अनà¥à¤µà¤¾à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से जिले के सांसà¥à¤•ृतिक, पौराणिक व à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• महतà¥à¤µ को पिरोने वाले ओ. पी. अवसà¥à¤¥à¥€, वरिषà¥à¤ पतà¥à¤°à¤•ार पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¶à¤‚कर अवसà¥à¤¥à¥€ ने कहा कि विरासत को सहेजने की फिकà¥à¤° किसी को नहीं है। सांसद, विधायक निधि सहित जिला योजना से धरोहरों के लिठकà¥à¤› न किया जाना दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि जरूरत है कि धरोहर पखवारा मना सà¥à¤•ूली बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ का महतà¥à¤µ बताते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥à¤°à¤®à¤£ कराया जाà¤à¥¤ जिससे नई पीढ़ी तक अतीत के महतà¥à¤µ को पहà¥à¤‚चाया जा सके।अगर à¤à¤¸à¤¾ नहीं हà¥à¤† तो वह दिन दूर नहीं है जब विरासत का नामो-निशां ही मिट जाà¤à¤—ा।आज सà¤à¥€ सà¥à¤¥à¤² उपेकà¥à¤·à¤¾ का शिकार है जिनकी ओर जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° व जनपदवासी धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नही देते।उपेकà¥à¤·à¤¾ के शिकार ये विरासते कà¤à¥€ गà¥à¤²à¤œà¤¾à¤° हà¥à¤† करती थी।
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