मà¥à¤¹à¤°à¥à¤°à¤® इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ महीना है और इससे इसà¥à¤²à¤¾à¤® धरà¥à¤® के नठसाल की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ होती है। लेकिन 10वें मà¥à¤¹à¤°à¥à¤°à¤® को हजरत इमाम हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ की याद में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® मातम मनाते हैं। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि इस महीने की 10 तारीख को इमाम हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ की शहादत हà¥à¤ˆ थी, जिसके चलते इस दिन को रोज-à¤-आशà¥à¤°à¤¾ कहते हैं। मà¥à¤¹à¤°à¥à¤°à¤® का यह सबसे अहम दिन माना गया है। इस दिन जà¥à¤²à¥‚स निकालकर हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ की शहादत को याद किया जाता है। 10वें मà¥à¤¹à¤°à¥à¤°à¤® पर रोज़ा रखने की à¤à¥€ परंपरा है।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ मनाया जाता है मà¥à¤¹à¤°à¥à¤°à¤®?
इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इराक में यजीद नाम का जालिम बादशाह इंसानियत का दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ था। यजीद खà¥à¤¦ को खलीफा मानता था, लेकिन अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ पर उसका कोई विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ नहीं था। वह चाहता था कि हजरत इमाम हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ उसके खेमे में शामिल हो जाà¤à¤‚। लेकिन हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ को यह मंजूर नहीं था और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यजीद के विरà¥à¤¦à¥à¤§ जंग का à¤à¤²à¤¾à¤¨ कर दिया था।
पैगंबर-ठइसà¥à¤²à¤¾à¤® हजरत मोहमà¥à¤®à¤¦ के नवासे हजरत इमाम हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ को करà¥à¤¬à¤²à¤¾ में परिवार और दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के साथ शहीद कर दिया गया था। जिस महीने हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ और उनके परिवार को शहीद किया गया था वह मà¥à¤¹à¤°à¥à¤°à¤® का ही महीना था।
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