गà¥à¤šà¥à¤›à¥€ औषधीय गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होती है। इसका औषधीय नाम मारà¥à¤•à¥à¤²à¤¾ à¤à¤¸à¥à¤•à¥à¤¯à¥‚पलेटा है। यह सà¥à¤ªà¤‚ज मशरूम के नाम से देश à¤à¤° में मशहूर है। यह गà¥à¤šà¥à¤›à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤¦ में बेजोड़ और कई औषधियों गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र हैं।
सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में इसे छतरी, टटमोर या डà¥à¤‚घरू कहा जाता है। गà¥à¤šà¥à¤›à¥€ चंबा, कà¥à¤²à¥à¤²à¥‚, शिमला, मनाली सहित पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के कई जिलों के जंगलों में पाई जाती है। आज के दौर में अधिकतर लोग गà¥à¤šà¥à¤›à¥€ के गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से अनजान हैं। इसलिठइसका पूरा फायदा नहीं उठाया जा रहा है। गà¥à¤šà¥à¤›à¥€ ऊंचे पहाड़ी इलाके के घने जंगलों में कà¥à¤¦à¤°à¤¤à¥€ रूप से पाई जाती है। जंगलों के अंधाधà¥à¤‚ध कटान के कारण यह अब काफी कम मातà¥à¤°à¤¾ में मिलती है। यह सबसे महंगी सबà¥à¤œà¥€ है। इसका सेवन सबà¥à¤œà¥€ के रूप में किया जाता है। हिमाचल से बड़े होटलों में ही इसकी सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ होती है।
30,000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलो बिकने वाली गà¥à¤šà¥à¤›à¥€ को सà¥à¤ªà¤‚ज मशरूम à¤à¥€ कहा जाता है। यह सबà¥à¤œà¥€ हिमाचल, कशà¥à¤®à¥€à¤° और हिमालय के ऊंचे परà¥à¤µà¤¤à¥€à¤¯ इलाकों में ही होती है। यह गà¥à¤šà¥à¤›à¥€ बरà¥à¤« पिघलने के कà¥à¤› दिन बाद ही उगती है। इस सबà¥à¤œà¥€ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पहाड़ों पर बिजली की गडग़ड़ाहट और चमक से निकलने वाली बरà¥à¤« से होता है।
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