Ola-Uber कैब लेने पर जेब होगी ज्यादा ढीली

Ola-Uber कैब लेने पर जेब होगी ज्यादा ढीली

Ola-Uber कैब लेने पर जेब होगी ज्यादा ढीली

हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में छाई मंदी के लिए कैब एग्रीगेटर्स ओला-उबर को जिम्मेदार बताया था। जिसके बाद सोशल मीडिया में उनके इस बयान की काफी आलोचना हुई थी। वहीं अब सरकार इन कैब एग्रीगेटर्स को बेस फेयर से तीन गुना तक किराया बढ़ाने की मंजूरी दे सकती है।

सर्ज प्राइसिंग को लेकर पहले भी बवाल हो चुका है। सर्ज प्राइसिंग का मतलब है पीक ऑवर यानी जब सबसे ज्यादा मांग हो, उस दौरान ओला, उबर जैसी कंपनियां ज्यादा किराया वसूलना चाहती हैं। ईटी की खबर के मुताबिक कैब एग्रीगेटर्स कंपनियों को लिए नए नियम बनाए जा रहे हैं। वहीं ओला और ऊपर जैसी कंपनियां मांग और आपर्ति के बीच संतुलन बिठाने के लिए शुरू से ही सर्ज प्राइसिंग की वकालत करती रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक सरकार नई नीति में कंपनियों को बता सकती हैं कि वे सर्ज प्राइसिंग के तहत कितना किराया वसूल सकती हैं। दिसंबर 2016 की गाइडलाइंस के मुताबिक इसमें कुछ दूसरे नियमों को भी शामिल किया जाएगा। संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट पास होने के बाद कैब एग्रीगेटर्स के लिए भी नए नियम लाए जा रहे हैं। एक्ट में पहली बार कैब एग्रीगेटर्स को डिजिटल इंटरमीडियरी यानी मार्केट प्लेस माना गया है। वहीं नए नियम पूरे देश में लागू होंगे, लेकिन राज्यों को इन्हें बदलने के अधिकार होगा।

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