बुर्का, घूंघट दोनों बंद किये जाएं : लक्ष्मीकांत चावला

बुर्का, घूंघट दोनों बंद किये जाएं : लक्ष्मीकांत चावला

बुर्का, घूंघट दोनों बंद किये जाएं : लक्ष्मीकांत चावला

 à¤…मृतसर (एजेंसी )| à¤­à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पंजाब की पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत à¤šà¤¾à¤µà¤²à¤¾ ने आज मांग की है कि बुर्का और घूंघट, दोनों प्रथाओं को बंद किया जाना चाहिए।उन्होंने यहां जारी बयान में कहा कि बुर्का और घूंघट दोनों ही महिलाओं के मानवीय अधिकारों को सरेआम छीनते हैं। उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि देश के महिला आयोग और मानव अधिकार आयोग के सरकारी, गैर सरकारी संगठन ने भी इस ओर कभी ध्यान नहीं दे रहे। 

श्रीमती चावला ने कहा कि कितना अच्छा हो कि बुर्के और घूंघट की वकालत करने वाले पुरुषों को कुछ दिन बुर्के और घूंघट में रखा जाए और उस हालत में उन्हें मीलों तक सिर पर तीन तीन घड़े पानी के उठाकर चलने को कहा जाए। 

उन्होंने कहा कि एक आतंकवादी घटना होने के बाद श्रीलंका सरकार ने बुर्के पर पाबंदी लगा दी है और भी कुछ देशों में बुर्का तथा परदा प्रथा बंद की है। à¤‰à¤¨à¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में ताजी घटना है जहां संघ के कार्यकर्ता चंद्रकांत को आतंकवादी ने बुर्का पहनकर ही गोली मारी है। आतंकवाद की घटनाओं को सरकार न भी याद रखे, तब भी महिलाओं को इस तरह बुर्के और घूंघट में बंद रखना सामाजिक और धार्मिक आतंकवाद है, जिसका शिकार महिलाएं हो रही हैं।

 à¤­à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ नेता ने कहा कि देश के सभी जागरूक नागरिक, समाजसेवी संस्थाएं और सभी धर्मों के धर्म गुरु इसके विरुद्ध आवाज उठाएं, पर यही बात यह है कि जब तक महिलाएं स्वयं नहीं इसका विरोध करतीं तब तक इसे बंद करना कठिन है। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं से प्रश्न किया कि जब वे देश के उच्च पदों पर बैठकर शासन करती रहीं तब उन्होंने अपनी साथी महिलाओं को इस यातना से क्यों मुक्त नहीं किया? उन्होंने इसीके साथ यह भी कहा कि देश की अनेकों हिंदू और मुस्लिम महिलाएं भारत के उच्च पदों पर रहीं, आज भी हैं। देश और प्रदेशों की प्रथम महिलाएं भी बनीं, पर उन्होंने अपनी घूंघट और बुर्के में बंद बहनों के लिए क्यों कुछ नहीं किया?

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