शà¥à¤°à¥€à¤¨à¤—र(à¤à¤œà¥‡à¤‚सी ) शà¥à¤°à¥€à¤¨à¤—र के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ इलाके में à¤à¤• कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ पंडित ने 29 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के लंबे अंतराल के बाद दोबारा अपनी दà¥à¤•ान खोलकर जमà¥à¤®à¥‚-कशà¥à¤®à¥€à¤° से विसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ पंडितों की वापसी को नया बल पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया है।
रोशन लाल मावा की दà¥à¤•ान पर वरà¥à¤· 1990 के अकà¥à¤Ÿà¥‚बर में कà¥à¤› अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ बंदूकधारियों ने हमला कर दिया था जिसमें वह गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हो गठथे। हमले के बाद शà¥à¤°à¥€ मावा कशà¥à¤®à¥€à¤° घाटी से पलायन कर जमà¥à¤®à¥‚ में आ गठथे। इसके बाद शà¥à¤°à¥€ मावा ने दिलà¥à¤²à¥€ में आकर मसालों का कारोबार करना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी दà¥à¤•ान का नाम ‘नंदलाल महाराज कृषà¥à¤£à¤¨’ ही रखा था।
इसी बीच, शà¥à¤°à¥€ मावा के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ समेत सैकड़ों सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ लोगों ने नई दà¥à¤•ान पर जाकर उनका सà¥à¤µà¤¾à¤—त किया।
अब 74 वरà¥à¤· के हो चà¥à¤•े शà¥à¤°à¥€ मावा ने कहा कि उनके दिल की इचà¥à¤›à¤¾ थी कि वह अपने पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ की धरती पर दोबारा लौटें। शà¥à¤°à¥€ मावा ने कहा, “ दिलà¥à¤²à¥€ में अचà¥à¤›à¥‡ कारोबार के बावजूद, मैं हमेशा से कशà¥à¤®à¥€à¤° में वापस आकर बसना चाहता था।”
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया, “ 13 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1990 को à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ मेरी दà¥à¤•ान में आया और गोलियां चलाईं। मà¥à¤à¥‡ चार गोलियां लगीं, तीन गोलियां पेट में लगी जबकि à¤à¤• कंधे पर लगी। ईशà¥à¤µà¤° की कृपा से मैं बच गया।”
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा,“ मैंने अपनी दà¥à¤•ान दोबारा खोली है, बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में लोगों ने आकर अपना समरà¥à¤¥à¤¨ जताया। लोगों का समरà¥à¤¥à¤¨ मिलने से बहà¥à¤¤ खà¥à¤¶à¥€ है।”
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