नगर निगम सख्त, अब चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए खोले गए खाते होंगे बंद

नगर निगम सख्त, अब चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए खोले गए खाते होंगे बंद

नगर निगम सख्त, अब चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए खोले गए खाते होंगे बंद

पचास फीसदी खाते आए दायरे में, अलग-अलग बैंकों में हैं 149 खाते

लखनऊ।नगर निगम में चहेतों को खुश करने के लिए खोले गए सैकड़ों खातों को बंद करने की तैयारी चल रही है। आगे से ऐसा कोई भी खाता न खोला जाए इसके भी निर्देश लेखा विभाग को दिए गए हैं। नगर निगम का लेखा विभाग इन दिनों अपने उन बैंक खातों को बंद करने की तैयारी कर रहा है जिनकी आवश्यकता नहीं है। 

दरअसल, मौजूदा समय में नगर निगम के अलग-अलग बैंकों में 149 खाते हैं। इनमें से आधे से अधिक बंद किए जा सकते हैं क्योंकि अधिक बैंक खातों के कारण अफसरों को यही पता नहीं चल पाता कि उनके किस खाते में कितना पैसा है। नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी की समीक्षा में यह स्थिति सामने आने के बाद अब आवश्यक खाते ही रखे जाएंगे। शेष को बंद किया जाएगा। इसके अलावा कुछ मदों के खाते दो-दो बैंकों में हैं। अब एक मद का एक ही खाता रखा जाएगा। वहीं, हर जोन में आय के जो प्रमुख मद हैं, उनका एक ही खाता होगा। इसके अलावा, तमाम खातों में सालों तक कोई लेन-देन नहीं हुआ। उनको भी बंद किया जा सकता है। कुछ साल पहले नगर निगम में खाते विभिन्न निधियों के तहत खोले गए थे। ऑडिट की जांच में इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज की गई थी। कई बार इनका हिसाब मांगे जाने के बाद भी अफसर नहीं दे रहे थे।

 à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के निर्देशों के बाद अफसरों ने किसी तरह बैंक खातों का ब्यौरा जमा किया। ऑडिट विभाग ने सभी खातों को बंद करने के निर्देश दिए थे। इन पर गड़बडिय़ों का भी आरोप था। शासन के निर्देश के बाद सभी खातों की जांच कराई गई। इसमें 50 से अधिक नॉन-फंक्शनल खाते पाए गए थे। इनमें दो-दो सालों तक कोई भी ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है।

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