सिस्टम को कुतरने की कला

सिस्टम को कुतरने की कला

सिस्टम को कुतरने की कला

पीयूष पांडे

एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस वक्त करीब 240 करोड़ चूहे हैं। यानी प्रति व्यक्ति के पीछे करीब दो चूहे। सरकार बता रही है कि अच्छे दिन à¤† गए हैं। ज़ाहिर है चूहों के भी अच्छे दिन चल रहे हैं। आलम यह है कि छह चूहे दिन में एक आदमी का भोजन चट कर जाते हैं। साल में करीब 40 करोड़ लोगों का पेट भरने लायक खाना चूहे खा रहे हैं। कुल मिलाकर चूहों की मौज चल रही है। आज से नहीं बरसों से चल रही है। चूहे अपना काम करते हैं, और निकल लेते हैं, लेकिन हम लोग अमूमन चूहों को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होते। घरों में एक-दो चूहों को तो गणपति का दूत मानकर स्पेशल स्टेटस मिला ही रहता है।

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चूहे बिंदास होते हैं। बेखौफ। कहीं भी, कभी भी दांत मारकर बिल में घुस जाते हैं। सिस्टम को दांत मारकर कुतरने वाले चूहे भी ऐसे ही होते हैं। दांत मारा, थोड़ा कुतरा, और जब तक किसी को पता चला, बिल के अंदर घुस गए। आज़ादी के बाद से सिस्टम को कुतरने वाले इंसान रूपी चूहे फल-फूल रहे हैं। ये कितने लोगों का खाना, मकान, कपड़ा, कंप्यूटर, चारा चट कर रहे हैं, इसका खुलासा किसी रिपोर्ट में कायदे से नहीं हुआ। चूहे बिल्ली से डरते हैं। मगर सिस्टम के चूहों पर थोड़े दिनों तक अंकुश लगाने वाली बिल्लियां कभी-कभार आईं, लेकिन इन चूहों को पूरी तरह खामोश कोई नहीं कर पाया। जिस तरह असली चूहों का एक जोड़ा साल में बड़ी संख्या में नन्हे चूहों को जन्म देता है, वैसे सिस्टम को सेंध लगाने वाला इंसानी चूहा अपने आसपास कई नए चूहों की फौज तैयार करता है। वैज्ञानिकों के मुताबित चूहे में छेनी के आकार वाले एक जोड़ी कुतरने वाले दांत होते हैं, जिन्हें इंसाइजर कहा जाता है। चूहों के ये दांत रोजाना करीब 0.4 मिलीमीटर की दर से बढ़ते रहते हैं। लेकिन सिस्टम के भ्रष्ट चूहों के दांत, पेट, लालच और हड़पने की हवस किस रफ्तार से बढ़ेगी-इसका आकलन दुनियाभर के वैज्ञानिक अभी तक नहीं कर पाए हैं। दिलचस्प यह कि बिल्ली के गले में घंटी बांधने वाले तमाम वीर बहादुर ऐसे चूहों के गले में घंटी नहीं बांध पाए हैं।

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हद ये कि सिस्टम के भ्रष्ट चूहे मौका मिलने पर असली चूहों को दोषी साबित कर डालते हैं। मसलन बिहार में शराबबंदी के बाद मालखाने से सैकड़ों लीटर शराब गायब हो गई तो सिस्टम के चूहों ने असली चूहों को शराबी करार दे डाला। गोदामों से अनाज गायब होने पर चूहों पर अनाज खाने का आरोप तो अक्सर लगता रहता है। असली चूहों का कोई संगठन, कोई पार्टी नहीं है, इसलिए उन्हें तो आरोप झेलने ही होंगे। और सिस्टम के भ्रष्ट चूहों को इसलिए चिंता नहीं कि उनके माईबाप हर संगठन, हर पार्टी में हैं। यदा कदा जेल भी जाते हैं, तो जेल के सख्त सिस्टम को भी कुतरने की कला जानते हैं।

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