पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित आवास एवं अन्य सुविधा असंवैधानिक घोषित

पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित आवास एवं अन्य सुविधा असंवैधानिक घोषित

पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित आवास एवं अन्य सुविधा असंवैधानिक घोषित

 à¤¨à¥ˆà¤¨à¥€à¤¤à¤¾à¤²(एजेंसी) | उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को शुक्रवार को उच्च न्यायालय की ओर से उस समय जबर्दस्त झटका लगा जब न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाले आवास एवं अन्य सुविधाओं को अवैध एवं असंवैधानिक घाेषित किया।


मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन की युगलपीठ ने आज अपने महत्वपूर्ण निर्णय में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाले आवास व अन्य सुविधाओं को अवैध व असंवैधानिक घोषित करार दिया और सरकार को सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास किराया एवं अन्य मदों की वसूली बाजार दर पर करने के निर्देश दिये। सभी को छह माह के अंदर सरकारी खाते में लंबित राशि जमा करने का निर्देश दिया और ऐसा न करने पर सरकार को वसूली करने के निर्देश दिये गये हैं। 


याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने आज यह जानकारी दी। श्री गुप्ता ने बताया कि अदालत ने दिवंगत मुख्यमंत्री श्री नारायण दत्त तिवारी को लेकर निर्देश जारी नहीं किये लेकिन लंबित धनराशि को उनकी सम्पत्ति या वारिसों से वसूल करने के मामले में सरकार के विवेक पर छोड़ दिया है। श्री गुप्ता ने कहा कि अदालत ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के रवैये पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि मुख्यमंत्री पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सभी ने जीवन भर के लिये आवास आवंटित कर लिया। अदालत ने पृथक राज्य बनने के बाद 2001 से ही इसे असंवैधानिक करार दिया है।


अदालत के फैसले से जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को आज झटका लगा उनमें सर्वश्री रमेश पोखरियाल निशंक, बीसी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, विजय बहुगुणा एवं स्व. श्री नारायण दत्त तिवारी शामिल हैं। सभी को बाजार दर पर किराया जमा के निर्देश दिये गये हैं। श्री गुप्ता ने बताया कि बाजार दर के हिसाब से पूर्व मुख्यमंत्री निशंक से 40 लाख 95 हजार 560 रुपये, श्री खंडूरी से 46 लाख 95 हजार 776 रुपये, विजय बहुगुणा से 37 लाख 50 हजार 638 रुपये, भगत सिंह कोश्यारी से 47 लाख 57 हजार 758 रुपये और दिवंगत नारायण दत्त तिवारी से सबसे अधिक एक करोड़ 12 लाख 98 हजार 182 रुपये वसूले जाने हैं। हालांकि अदालत ने दिवंगत मुख्यमंत्री नारायण दत्त के संबंध में निर्देश जारी नहीं किया है। 
याचिकाकर्ता की ओर से सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से बिजली, पानी, पेट्रोल के अलावा अन्य सुविधाओं पर खर्च की गयी 13 करोड़ से अधिक धनराशि की वसूली करने की प्रार्थना भी की गयी। अदालत ने कहा कि सरकार चार महीने के अंदर सभी मदों का हिसाब बनाकर प्रतिवादियों को सौंपे और उसके छह माह के भीतर सभी पूर्व मुख्यमंत्री उसका भुगतान करें। अदालत ने ऐसा नहीं करने पर सरकार को वसूली प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश जारी किया है। 


अदालत ने ये निर्देश देहरादून की गैर सरकारी संस्था रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटलमेंट केन्द्र (रलेक) की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद शुक्रवार को जारी किये। वर्ष 2010 में दायर याचिका में कहा गया कि उत्तर प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री आवास आवंटन, 1997 संबंधी नियमावली उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू नहीं होती है। निजी आवास होने के बावजूद सरकार से पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास आवंटित किया है। जो गलत है। याचिकाकर्ता की ओर से सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार दर पर किराया वसूलने की मांग की थी। 

add image

Recent Comments

  • Blog single photo

    17-Jun-2019 at 12:26:45pm

    0     0

Leave a comment

Top